गुंटूर मंड़ी में गर्मियों की छुट्टिïयां चालू होने के बाद भी यहां लालमिर्च में मंदी आई है क्योंकि बरेली की फसल की वजह से आपूर्ति में सुधार हुआ है। आगामी दिनों में इस प्रमुख किराना जिंस में सुस्ती का माहौल बन सकता है। 11 मई से आंध्र प्रदेश की गुंटूर मंड़ी में एक महीने तक चलने वाली गर्मियों की छुट्टिïयां चल रही हैं। अब वहां 12 जून से कामकाज सामान्य होने की उम्मीद है। इसके बाद भी यहां लालमिर्च की थोक कीमत में मंदी आई है क्योंकि यहां बरेली की फसल चल रही है। हालांकि बरेली से इसकी एक छोटी फसल आती है लेकिन फिलहाल इसकी वजह से आपूर्ति में सुधार हुआ है। यही वजह है कि यहां 334 नंबर लालमिर्च हाल ही में एक 500 रुपए मंदी होकर 22/23 हजार रुपए प्रति क्विंटल रह गई। गर्मी की छुट्टिïयां शुरू होने से पूर्व गुंटूर मंड़ी में लालमिर्च की करीब 70 हजार बोरियों की आवक ऊंची होने तथा निर्यातकों की सक्रियता भी बनी होने से लालमिर्च की कीमत मजबूत बनी होने की जानकारी मिली थी। तेलंगाना की वारंगल मंडी में भी आवक घटती हुई करीब 20-25 हजार बोरियों की होने की जानकारी मिली। इस बार लालमिर्च के उत्पादन में करीब 25-30 प्रतिशत की कमी आई है।बहरहाल, गर्मी की छुट्टिïयां आरंभ होने से पूर्व गुंटूर में 334 नंबर लालमिर्च फिलहाल 10,500/22,000 रुपए प्रति क्विंटल के पूर्वस्तर पर रुकी हुई थी। 341 नंबर 18,500/22,000 रुपए पर डटी हुई थी। तेजा तथा फटकी समेत अन्य किस्मों की लालमिर्च में भी स्थिरता बनी होने की सूचना मिली। इसी प्रकार, तेलंगाना की वारंगल मंडी में भी फटकी लालमिर्च फिलहाल 12,500/15,500 रुपए प्रति क्विंटल के बनी होने की जानकारी मिली। 341 नंबर 19,000/22,500 रुपए पर डटी हुई है। उधर, मसाला बोर्ड के आंकड़ो के अनुसार वर्तमान वित्त वर्ष दस महीनों यानी अप्रैल-जनवरी, 2025-26 में लालमिर्च का मात्रात्मक निर्यात तुलनात्मक रूप से 18 प्रतिशत बढक़र 5,72,757 क्विंटल हो गया। आय भी 3 प्रतिशत बढक़र 8150.34 करोड़ रुपए हुई। एक वर्ष पूर्व की आलोच्य अवधि में देश से 7889.78 करोड़ रुपए कीमत की 4,84,219 टन लालमिर्च का निर्यात हुआ था। आगामी समय में लालमिर्च में सुस्ती बनी रह सकती है।