मकई में पिछले वर्ष किसानों एवं कारोबारियों को भारी घाटा लगने से इस बार बिहार में बिजाई कम हुई थी, जिससे उत्पादन भी 8-9 लाख मीट्रिक टन कम हुआ है। बिहार के बाद यूपी की फसल छिटपुट आने लगी है, लेकिन वहां भी फसल अनुकूल नहीं है तथा मौसम खराब होने से प्रभावित हुई है, इन परिस्थितियों में वर्तमान भाव की मकई में घटने की बिल्कुल गुंजाइश नहीं है स बार गर्मी के सीजन में बिहार के खगडिय़ा बेगूसराय दरभंगा गुलाब बाग पूर्णिया सेमापुर पानीपतरा लाइन में मक्की के भाव 2000/2050 रुपए प्रति क्विंटल खुलकर वर्तमान में 1800/1900 रुपए नमी व डस्ट के हिसाब से रह गए हैं। हल्के माल 1750 रुपए भी बिक रहा है, जो बीते सप्ताह में 50/60 रुपए प्रति कुंतल दबा हुआ है। गौरतलब है कि बीते जुलाई-अगस्त में आई यूपी की औने-पौने भाव में कट चुकी थी, उसके बाद मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा लिंगा शिवनी बैतूल गंज मुलताई लाइन में नीचे में मक्की 1500/1725 रुपए प्रति क्विंटल बिक रही थी। यही कारण है कि इस बार बिहार में भी बिजाई कम हुई थी तथा यूपी के बहराइच कन्नौज लाइन में भी बिजाई कम हुई है तथा मौसम की मार अभी से पडऩे लगी है। कन्नौज लाइन में 1750/1850 रुपए प्रति क्विंटल लूज में मक्की बिक रही है तथा मंडियों में आवक अनुकूल नहीं है तथा प्रत्येक सप्ताह आंधी बरसात का दौर चल रहा है। हम मानते हैं कि बिहार में मकई में हाल ही में गिरावट आई है तथा गत वर्ष की दहशत से छोटे कारोबारी स्टॉक नहीं कर रहे हैं, बड़ी कंपनियां अपने सीमित दायरे में खरीद रही है, जिस कारण बाजार दब गया है, लेकिन यूपी की फसल को देखकर तथा हरियाणा पंजाब में स्टॉक में कमी के साथ-साथ स्टार्च मिलों की पकड़ मजबूत को देखते हुए वर्तमान भाव की मकई में भरपूर तेजी लग रही है तथा इन भाव में अब घटने की बिल्कुल गुंजाइश नहीं है। हरियाणा पंजाब पहुंच में बिहार की मक्की 2200/2250 रुपए क्वालिटी अनुसार बिक रही है, हल्का माल 2150 रुपए भी बिक रहे हैं, अब यह निचले वाले दिखाई दे रहे हैं। ट्रक भाड़े 260 रुपए प्रति कुंटल का 320 रुपए हो गया है, इसलिए वहां जो भाव है, इससे नीचे नहीं जाएगा।