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डाबर के तेजी से बढ़ते कदम
डाबर आज देश भर में सबसे तेजी से आगे बढ़ रही फास्ट मूविंग कन्ज्यूमर गुड्स यानि एफएमसीजी कम्पनियों में शामिल है। पिछले कई वर्षों से डाबर सुपरब्रांड की श्रेणी में भी शामिल है। आज एफएमसीजी उत्पादों का शायद
स्पाइस का स्पाइसी सक्सेस
1990 के दशक की शुरुआत में भारत में नरसिम्हाराव के नेतृत्व वाली सरकार ने लाइसेन्सराज की चूलें हिला दी थी। इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र की सफेद हाथी जैसी
मंदी और कारोबारी प्रबन्धन
यदि किसी कम्पनी की आर्थिक सेहत अच्छी है तो मंदी के इस माहौल में वर्ष 2009 काफी महत्वपूर्ण होगा। इस वर्ष कम्पनियां यदि सही अवसर तलाश कर सही निर्णय करती हैं तो आने वाले वर्षों में कम्पनी के भविष्य के निर्धारण में महत्वपूर्ण कदम साबित हो
मंडे स्पेशल
मालिश कर॓ं, चुस्त रहें
आमतौर पर उम्र के साथ नसें तथा नाड़ियों की सक्रियता कमजोर होने लगती हैं। बढ़ती आयु के साथ मांसपेशियां तथा हडि्डयां भी कमजोर हो जाती हैं जिससे व्यक्ति अधिक काम नहीं कर पाता। इसका प्रभाव उसकी शारीरिक तथा मानसिक कार्यक्षमता पर पड़ता है। यही नहीं, उसकी रोगों से लड़ने की शक्ति कम हो जाती है जिससे छोटा सा रोग भी लम्बे समय तक रहता है। चिकित्सकों का कहना है कि जितनी शारीरिक निष्क्रियता बढ़ती है, व्यक्ति उतनी ही जल्दी बीमार पड़ता है। यही नहीं, शरीर की रोग प्रतिरोधात्मक शक्ति कम होने के कारण संक्रमण का प्रभाव ऐसे व्यक्तियों पर अधिक पड़ता है।

बढ़ती उम्र में शरीर को अधिक सक्रिय, चुस्त तथा स्वस्थ बनाये रखने के लिये जहां व्यायाम आवश्यक है, वहीं नित्य मालिश करना अति फायदेमंद होता है। शरीर को मजबूत बनाये रखने के लिये संयमित रहन-सहन के साथ पौ‌ष्टिक भोजन, व्यायाम तथा शरीर की नियमित मालिश करनी चाहिए। इससे त्वचा में चमक आती है तथा चेहर॓ के साथ शरीर का आकर्षण बढ़ता है। शरीर की मालिश करने से रक्त कोशिकाएं तथा त्वचा एक्टिव हो जाती है।

एक अध्ययन में पाया गया है कि पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों की हडि्डयां जल्दी कमजोर होती हैं। हर उम्र की स्त्रियों को शारीरिक गतिशीलता बनाये रखने के लिये नियमित मालिश करनी चाहिए। सर्दियों के दिनों में शरीर का तापमान वैसे भी कम हो जाता है जिसके कारण ऊपरी त्वचा रूखी होने लगती है तथा जहां-तहां से फटने लगती है और रक्त निकलने लगता है। यह स्थिति काफी दर्दकारक हो सकती है। सर्दियों में रक्त संचार की गति धीमी होती है। यही कारण है कि जिन लोगों को हृदय रोग होता है, उनको इस मौसम में हृदयाघात की संभावना काफी बढ़ जाती है। इन लोगों को ेसर्दी के सम्पर्क में अधिक समय तक नहीं रहना चाहिए। जहां तक हो सके, पर्याप्त मात्रा में गर्म कपड़े पहन कर ही घर के बाहर निकलें। जिन लोगों का रक्त प्रवाह कम रहता है अर्थात् लो ब्लड प्रेशर हो, उनकेे लिये मालिश बहुत लाभदायक है।

मालिश के तरीके : मालिश करने के कई तरीके हैं। मालिश ऊपर से नीचे की ओर करनी चाहिए। किसी विशेष रोग के कारण मालिश की जरूरत हो तो पहले फिजियोथैर॓पिस्ट मालिश के तौर-तरीकों की सही जानकारी करनी चाहिए अन्यथा इससे नुकसान भी हो सकता है। प्राकृतिक एवं योग सलाहकार संगीता गर्ग के अनुसार मालिश सहज तरीके से करनी चाहिए। अधिक दबाव या जोर लगा कर या ताकत का प्रयोग करने से रक्त कोशिकाओं को नुकसान हो सकता है इसलिये हल्के व ढीले हाथ से मालिश करनी चाहिए। मालिश जल्दी-जल्दी या तेज हाथों से नहीं करनी चाहिए, इससे शरीर के बाल टूटने तथा बाल तोड़ जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। हृदय तथा हडि्डयों के रोगियों को अधिक सावधानीपूर्वक ही मालिश करनी चाहिए, अधिक घर्षण करने से इनकी पर॓शानी बढ़ सकती है।

मालिश के लिये तेल का चुनाव : मालिश के लिये विभिन्‍न प्रकार के तेलों का प्रयोग किया जा सकता है। मौसम के हिसाब से तेल का चुनाव करना चाहिए। सर्दियों में गर्म तासीर तथा गर्मियों में शीतल प्रकृति के तेलों का प्रयोग करना चाहिए। साधारणतः सरसाें का तेल सभी मौसम में अनुकूल है। सर्दियों में यह शरीर में गर्माहट देता है। सरसों का तेल सभी जगह सहज उपलब्ध है तथा हर वर्ग इसका प्रयोग कर सकता है। बालकों की मालिश के लिये गाय का घी सबसे उत्तम माना गया है। इसके अलावा जैतून, बादाम, सूरजमुखी, तिल्ली, घी तथा नारियल तेल का भी उपयोग किया जा सकता है। जैतून, अरोमा, चमेली, गुलाब, रोजमरी, जिर॓नियम आदि अनेक तेलों में औषधीय गुण होते हैं। इन तेलों की मालिश के लिये चिकित्सक से राय लेनी चाहिए क्योंकि ये तेल हर मौसम में उपयुक्त नहीं होते। जिन लोगों को तेल विशेष से एलर्जी हो, उनको पहले चिकित्सक से इसकी जांच कराकर ही मालिश करनी चाहिए। राजस्थान जैसे शुष्क प्रदेश में सरसों तथा गाय का घी सबसे उपयुक्त है।

महिलाओं को दैनिक कार्यों के साथ जहां व्यायाम आवश्यक है, वहीं नियमित मालिश से रक्त संचार बना रहता है। आजकल प्रौढ़ आयु की महिलाएं महंगी ब्यूटी पार्लर में केवल चेहर॓ की मसाज कराती हैं परन्तु हाथ-पैरों को दुरुस्त करना भूल जाती हैं जबकि हाथ-पैराें का गतिशील रहना अधिक जरूरी है।

रोग निदान में सहायक : मालिश अनेक रोगों का प्राकृतिक इलाज है। इससे निष्क्रिय नसों तथा नाड़ियों में रक्त प्रवाह बनाये रखने में सहायता मिलती है। इससे अनेक त्वचा संबंधी रोग दूर होते हैं। मोटापा, पोलियो, अस्थमा, हृदय, जोड़ दर्द, डिप्रेशन तथा तनाव आदि में मालिश काफी कारगर है। मालिश करने की अपनी खास शैली होती है। रोग विशेष के लिये मालिश के तरीकों की जानकारी विशेषज्ञ से प्राप्त करनी चाहिए अन्यथा इससे नुकसान हो सकता है।

मालिश का लाभ : मालिश से शारीरिक थकावट दूर होती है तथा चुस्ती-फुर्ती बनी रहती है। इससे शरीर को ऊर्जा मिलती है तथा कई प्रकार के त्वचा रोग दूर होते हैं। नसों, धमनियों तथा मांसपेशियों में रक्त प्रवाह सुदृढ़ होने से रक्त संचार सुचारु होता है। शरीर के अन्दर जमे हुए अनेक विजातीय तत्व बाहर निकल जाते हंै जिससे शरीर की त्वचा की अन्दर से सफाई हो जाती है। इससे शरीर में लचीलापन आता है तथा जोड़ मजबूत होते हैं, इससे कार्यक्षमता का विकास होता है।


‘‘यदि हमार॓ भीतर उच्च अहिंसा के भाव हों तो शेर भी अपना हिंसक भाव भूल जाता है।’’
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