लौह अयस्क में शुरू हो सकता है वायदा   <<  यूनिटेक लिमिटेड  <<  एक और पार्किंग पर एएसआई का अड़ंगा  <<  नए डवलपर्स को आकर्षित कर रहा है अफोर्डेबल हाउसिंग सेगमेंट  <<  मुम्बई से प्रत्यक्ष कर आय रा‌ष्ट्रीय औसत से कम : प्रणव मुखर्जी   <<  जुलाई में निर्यात 13 प्रतिशत बढ़ा  <<  महिन्द्रा नेवीस्टार ट्रक एमएन-25 जयपुर में  <<  वाहनों ने बिगाड़ा अमेरिकियों का स्वास्थ्य  <<  दो घंटे में हो जायेगी टीबी की जांच  <<  मॉल संस्कृ ति को नहीं अपना सकी सूर्यनगरी  <<  
डाबर के तेजी से बढ़ते कदम
डाबर आज देश भर में सबसे तेजी से आगे बढ़ रही फास्ट मूविंग कन्ज्यूमर गुड्स यानि एफएमसीजी कम्पनियों में शामिल है। पिछले कई वर्षों से डाबर सुपरब्रांड की श्रेणी में भी शामिल है। आज एफएमसीजी उत्पादों का शायद
स्पाइस का स्पाइसी सक्सेस
1990 के दशक की शुरुआत में भारत में नरसिम्हाराव के नेतृत्व वाली सरकार ने लाइसेन्सराज की चूलें हिला दी थी। इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र की सफेद हाथी जैसी
मंदी और कारोबारी प्रबन्धन
यदि किसी कम्पनी की आर्थिक सेहत अच्छी है तो मंदी के इस माहौल में वर्ष 2009 काफी महत्वपूर्ण होगा। इस वर्ष कम्पनियां यदि सही अवसर तलाश कर सही निर्णय करती हैं तो आने वाले वर्षों में कम्पनी के भविष्य के निर्धारण में महत्वपूर्ण कदम साबित हो
मंडे स्पेशल
यदि किसी कम्पनी की आर्थिक सेहत अच्छी है तो मंदी के इस माहौल में वर्ष 2009 काफी महत्वपूर्ण होगा। इस वर्ष कम्पनियां यदि सही अवसर तलाश कर सही निर्णय करती हैं तो आने वाले वर्षों में कम्पनी के भविष्य के निर्धारण में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। अनेक ऐसी कम्पनियां हैं जिनके बोर्डरूम गंभीर चर्चा के केंद्र्र हैं लेकिन उनमें से अधिकांश कहां और कब और कितना निवेश करना है, इस बार॓ में स्पष्ट राय नहीं बना पा रही हैं।

अन्स्र्ट एंड यंग ने अपनी रिपोर्ट में अनिश्‍चितता के माहौल में कम्पनियों के कारोबार को बढ़ाने के लिये उपलब्ध अवसरों की समीक्षा की है। इस रिपोर्ट में प्रतिकूल परिस्थितियों में अवसरों का सृजन करने और उनका लाभ उठाने के लिये आवश्यक मुद्दों की भी चर्चा की है। रणनीतिक अधिग्रहण के लिये अपनी परिचालनीय कुशलता को कारगर करने और सही बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिये एक्ट नाऊ यानि तत्काल और गंभीर कदम उठाने की आवश्यकता है।

ग्लोबल फाइनेन्शियल क्राइसिस के इस दौर में जब मंदी की सबसे घातक मार पड़ी हो तब कम्पनियाें के अधिकारियों को जोखिम और अपने अस्तित्व को बचाये रखने को प्राथमिकता देने वाले मत पर अंगुली नहीं उठायी जा सकती। हालांकि ऐसा कर वे कठिन परिस्थितियों में उपलब्ध अवसरों की अवहेलना कर देते हैं। नब्बे के दशक की शुरुआत में भी मंदी का एक दौर आया था और इसमें कम्पनियों ने सतर्कता को ही सबसे अहम माना था लेकिन ऐसे माहौल में ही कई कम्पनियां ऐसी थी जिन्होेंने अपने कारोबार को बढ़ाने के लिये मौकों की तलाश कर रणनीतिक निर्णय ना सिर्फ किये बल्कि उन्हें कुशलता से लागू भी किया। इस प्रकार अगले तेजी के दौर में वे अपनी प्रतिस्पर्धी कम्पनियों के मुकाबले काफी मजबूत होकर उभरी।

प्रायः होता ऐसा है जब बाजार पर आर्थिक दबाव पड़ता है तो कम्पनियां अपने बिजनेस मॉडल की समीक्षा करने को मजबूर हो जाती हैं। ऐसे में कई अपने अधिकारियों के विवेकाधीन खर्च पर कैंची चलाने को सबसे बड़ा हथियार मानने लगती हैं लेकिन कम्पनी की शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग टर्म रणनीतिक योजनाओं पर कोई खास असर नहीं पड़ता है। यदि कम्पनी ने अपनी परिचालनीय कुशलता से समझौता कर खर्च में यह कटौती की है तो अगले तेजी के दौर में कम्पनी अपने प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले पिछड़ सकती है। अन्स्र्ट एंड यंग ने एक अरब डॉलर से अधिक कारोबार करने वाली कम्पनियों के अधिकारियों के मत जानने के लिये एक सर्वेक्षण किया था जिसमें 59 प्रतिशत से भी अधिक प्रतिभागियों ने मंदी के माहौल में भी नये अवसरों की तलाश करने पर विशेष जोर देने पर सहमति दी। नये उत्पादों का विकास, कुशल कर्मचारियों की नियुक्ति, नये बाजारों में सेंध लगाने आदि के जरिये कु छ कम्पनियां अपने बिजनस मॉडल को मजबूत कर रही हैं ताकि जैसे ही बाजार में तेजी आये, वे इसका लाभ उठाने में सबसे आगे रहें।

एक सफल बिजनेस मॉडल वही होता है जिसमें लचीलापन तो हो ही, बाजार में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने के लिये इसके स्तर को भी बढ़ाया जा सके। इसके अलावा इसमें तेजी से आ रहे बदलावों के अनुरूप अपने स्वरूप में आमूलचूल परिवर्तन करने की भी क्षमता होनी चाहिये। इसी प्रकार नये स्वरूप में ढलने के लिये इसकी नये कर्मचारियों की नियुक्ति, प्रशिक्षण और भारी पूंजीगत निवेश आदि पर निर्भरता नहीं होनी चाहिये। हालांकि अपने बिजनेस मॉडल में बदलाव करने के फेर में कम्पनियों को अपनी मूल क्षमताओं की अवहेलना भी नहीं करनी चाहिये क्योंकि प्रतिकूल परिस्थितियों में परिचालनीय कुशलता और भी अहम हो जाती है। इस सर्वे में 55 प्रतिशत प्रतिभागियाों ने ग्राहकों से होने वाले भुगतान में देरी को स्वीकार किया। ऐसे में कम्पनियों को अपनी प्रक्रियाओं को भी दुरुस्त करने पर भी जोर देना चाहिये, इसके अलावा कारोबार के सभी हिस्सों के बीच संवाद भी बेहतर होना चाहिये। इससे भुगतान प्राप्ति की स्थिति में तो सुधार होगा ही, राजस्व की छीजत भी कम होगी। इस प्रकार कम्पनी को ग्राहक और ऋणदाताओं के आर्थिक स्थिति का सही आकलन करने में मदद मिलेगी।

वित्तीय अस्थिरता के माहौल में ग्राहकों के साथ संवाद को बेहतर करने और उनकी शिकायतों का तुरंत समाधान करना काफी महत्वपूर्ण होता है। अब तक किये गये अध्ययनों से इस तर्क को स्थापित करने में मदद मिली है कि मंदी के दौर में ग्राहक के साथ सम्बंधों को मजबूत करने से कम्पनियों को बेहतर समय में लाभ होता है लेकिन इसके लिये मंदी के दौर में कम्पनियों को अपने ग्राहक वर्ग में से अच्छे ग्राहकों का चयन कर उनके साथ कारोबार को ना सिर्फ वरीयता देनी चाहिये बल्कि यदि इनके साथ कारोबार में लाभ का प्रतिशत अपेक्षाकृत कम होने पर भी इन्हें जोड़े रखने पर विशेष जोर देना चाहिये। अन्स्र्ट एंड यंग द्वारा किये गये इस सर्वे में 72 प्रतिशत प्रतिभागियों ने अपने बड़े ग्राहकों को तरजीह देने पर सहमति दी जबकि 31 प्रतिशत ने जोखिम वाले ग्राहकों के साथ कारोबार को खत्म करने का मत व्यक्त किया। इस सर्वे में 53 प्रतिभागियों ने यह स्वीकार किया कि उनके ग्राहकों की आर्थिक स्थिति में गिरावट आने के कारण उनकी ऋण चुकाने की क्षमता में कमी आई है जबकि 51 प्रतिशत ने माना कि उनके वित्तीय दबाव झेल रहे उनके ग्राहकों की संख्या बढ़ी है। इस सर्वे में यह बात भी निकलकर आई कि आर्थिक अस्थिरता के इस माहौल में कम्पनियों के लिये अपने ग्राहकों की आर्थिक स्थिति की समीक्षा करना काफी आवश्यक है। इस सर्वे में 22 प्रतिशत अधिकारियों ने यह स्वीकार किया कि उनके सैक्टर में कीमत को लेकर प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ गई है। ऐसे माहौल में आर्थिक दबाव इतने बढ़ जाते हैं कि कम्पनियों को अपने पुराने सम्बंधों को भी तिलांजलि देनी पड़ जाती है। हालांकि कम्पनियों को पुराने सम्बंधों की समीक्षा करते समय एक संतुलन बनाये रखना आवश्यक है यदि संतुलन गड़बड़ाने के कारण पुराने ग्राहक कम्पनी से अलग हो जाते हैं तो कम्पनी के लाभ पर असर पड़ सकता है। कीमत को ताक पर रखकर भी ऐसे विकल्प तलाश किये जाने चाहिये जिनसे अपने परम्परागत ग्राहकों को बनाये रखने के साथ ही नये ग्राहकों को कम्पनी और ब्रांड से जोड़ने में मदद मिल सकती है। मुनाफे से समझौता किये बिना ग्राहक की संतु‌ष्टि में इजाफा करने के विकल्प भी तलाशने चाहिये। इसके लिये बंडलिंग ऑफ प्रोडक्ट्स यानि उत्पादों की जोड़ों में बिक्री भी की जा सकती है, इससे ग्राहकों को कम कीमत में कम पर॓शानी के ही दो उत्पाद मिल सकते हैं जबकि कम्पनी की बिक्री और मुनाफा दोनों में सुधार हो सकता है।


‘‘यह सही है कि हर नयी पीढ़ी को पुरानी पीढ़ी की अपेक्षा कुछ अधिक ही मेहनत करनी पड़ती है।’’

Current Rates